सेवाएँ
सिद्धपुर में हम ये विधियाँ कराते हैं
सिद्धपुर सबसे बढ़कर मातृगया पूजा — माँ के श्राद्ध — के लिए जाना जाता है। यही पुरोहित दूसरे पितृ कर्म और पूजाएँ भी कराते हैं, और जब कोई परिवार यात्रा न कर सके, तो विधि ऑनलाइन भी करा सकते हैं। खर्च विधि और उसमें शामिल चीज़ों पर निर्भर करता है — बुकिंग से पहले हम आपको खर्च का ब्योरा देते हैं।
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पितृ कर्म (श्राद्ध)
दिवंगत परिजनों के लिए की जाने वाली विधियाँ, जो बिंदु सरोवर पर हर चरण में पुरोहित के मार्गदर्शन के साथ संपन्न होती हैं।
मातृगया पूजा
इसे मातृ श्राद्ध, मातृ गया श्राद्ध, मातृ तर्पण भी कहते हैं
विशेष रूप से माँ के लिए किया जाने वाला श्राद्ध — वही विधि जिसके लिए सिद्धपुर जाना जाता है। इसमें बिंदु सरोवर पर तर्पण और पिंडदान शामिल हैं।
पिंडदान और तर्पण
इसे पिंड प्रदान, तर्पणम् भी कहते हैं
चावल के पिंडों का, और तिल व कुश के साथ जल का अर्पण — हर श्राद्ध का मूल, जो दूसरे पूर्वजों के लिए भी किया जाता है।
नारायण बलि
इसे नारायण बलि श्राद्ध भी कहते हैं
परंपरा से उस परिजन के लिए की जाती है जिसकी मृत्यु असमय या अस्वाभाविक हुई हो, या जिसके अंतिम संस्कार पूरे न हो पाए हों।
त्रिपिंडी श्राद्ध
इसे त्रिपिण्डी श्राद्ध भी कहते हैं
परंपरा से तब किया जाता है जब कई वर्षों तक पूर्वजों का श्राद्ध छूट गया हो, ताकि कई पीढ़ियों के पूर्वजों को शांति मिले।
पंच बलि श्राद्ध
ऐसा श्राद्ध जिसमें पाँच श्रेणियों के प्राणियों के लिए अर्पण किया जाता है; कुछ पारिवारिक परंपराओं में यह पितृ कर्मों का हिस्सा होता है।
वार्षिक श्राद्ध
परिजन के देहांत की तिथि पर हर साल किया जाने वाला श्राद्ध।
महालया श्राद्ध
पितृ पक्ष के दौरान किया जाने वाला श्राद्ध — पूर्वजों को समर्पित वह पखवाड़ा जो महालया (सर्व पितृ) अमावस्या पर पूरा होता है।
अस्थि विसर्जन
प्रियजन की अस्थियों का विसर्जन, उससे जुड़ी विधियों के साथ। सिद्धपुर में यह कैसे और कहाँ होता है, हमसे पूछें।
उत्तर क्रिया
मृत्यु के बाद दसवें, ग्यारहवें और बारहवें दिन (दशाह, एकादशाह और द्वादशाह) की विधियाँ, शुद्धि और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए।
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अन्य पूजाएँ और मार्गदर्शन
जीवित परिजनों और घर-परिवार के लिए विधियाँ, जिनकी व्यवस्था यही पुरोहित करते हैं।
हवन
एक वैदिक अग्नि अनुष्ठान, जिसमें मंत्रोच्चार के साथ पवित्र अग्नि में आहुतियाँ दी जाती हैं।
पूजा
किसी विशेष देवता या अवसर के लिए प्रार्थना और अर्पण के साथ उपासना।
नक्षत्र शांति पूजा
जब जन्म-नक्षत्र को अशुभ माना जाता है, तब की जाने वाली शांति विधि।
16 संस्कार कर्म
सोलह संस्कार — जन्म से पहले से लेकर अंतिम संस्कार तक के हिन्दू जीवन-संस्कार।
ज्योतिष मार्गदर्शन
हिन्दू पंचांग के आधार पर किसी विधि के लिए शुभ मुहूर्त चुनने में मदद।
तय नहीं कर पा रहे कि आपके परिवार के लिए कौन-सी विधि उचित है?
पुरोहित से पूछें